Top 10 Moral Stories in Hindi | नैतिक कहानियाँ हिंदी में

Top 10 Moral Stories in Hindi | 10 नैतिक कहानियाँ हिंदी में : कहानी अपने बच्चों को व्यस्त रखने का एक शानदार तरीका है। शायद आपके बचपन की सबसे स्पष्ट यादों में से एक वह कहानी है जो आप बचपन में पढ़ते हैं।

आपके बचपन की अधिकांश कहानियाँ शायद नैतिकता वाली कहानियाँ थीं। ये उस तरह की कहानियां नहीं हैं जो हम इन दिनों बहुत बार देखते हैं। क्या इन कहानियों को अपने बच्चे के साथ साझा करना आश्चर्यजनक नहीं होगा? क्यों न इस सूची से शुरू करें जिसे हमने आपके लिए एक साथ रखा है।

बच्चे कहानी सुनना और पढ़ना बहोत अच्छा लगता है। नैतिक कहानियां, डरावनी नी कहानियां, बच्चों के लिए मज़ेदार कहानियाँ, सुपर हीरो की कहानियां, रात को सोने से पहले सुननेवाली कहानियांछोटे बच्चो की कहानियां ओर भी कई तरह की कहानियां होती है। जो बच्चो को अच्छी लगती है।

नींद की कहानियाँ एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं बच्चों की परवरिश और उनकी मनोहारी दुनिया में संतुष्टि के लिए। ये कहानियाँ रात के समय बच्चों को सुलाने के लिए सुनाई जाती हैं और उनके सपनों में चमत्कारिक रूप से जीवित हो जाती हैं।

Top 10 Moral Stories in Hindi | 10 नैतिक कहानियाँ हिंदी में

नैतिक कहानियाँ हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हैं। ये कहानियाँ हमें बहुमूल्य जीवन पाठ पढ़ाकर और नैतिक मूल्य प्रदान करके हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। प्रत्येक कहानी एक अनूठा संदेश देती है जो हमारे दिलों को छूती है और हमारे दिमाग पर एक स्थायी छाप छोड़ती है। शीर्ष 10 नैतिक कहानियों के इस संकलन में, हम कहानियों के एक संग्रह का पता लगाते हैं जो न केवल मनोरंजन करते हैं बल्कि मानव स्वभाव, नैतिकता और सदाचार के महत्व में गहन अंतर्दृष्टि भी प्रदान करते हैं।

Top 10 Moral Stories in Hindi 10 नैतिक कहानियाँ हिंदी में
Top 10 Moral Stories in Hindi 10 नैतिक कहानियाँ हिंदी में

ये कहानियाँ मात्र मनोरंजन से परे हैं और हमें चिंतनशील विचारों में संलग्न करती हैं। वे संबंधित पात्र प्रस्तुत करते हैं जो विभिन्न चुनौतियों, दुविधाओं और जीत का सामना करते हैं, जिससे हमें उनके संघर्षों में खुद को देखने की अनुमति मिलती है। अपने मानवीय स्पर्श के साथ, ये कहानियाँ करुणा, सहानुभूति, दृढ़ता और अखंडता का सार सामने लाती हैं। वे हमें दया की शक्ति, ईमानदारी के महत्व और कड़ी मेहनत के पुरस्कार की याद दिलाते हैं।

कहानी कहने के माध्यम से, हमें एक ऐसी दुनिया में ले जाया जाता है जहाँ नैतिक दुविधाओं का समाधान किया जाता है, चरित्र महत्वपूर्ण जीवन सबक सीखते हैं, और अच्छाई की शक्ति बुराई पर विजय पाती है। प्रत्येक कहानी की अपनी अनूठी कथा शैली और सांस्कृतिक संदर्भ है, जो हमें हमारी दुनिया के विविध ज्ञान की सराहना करने में सक्षम बनाता है।

जैसा कि हम इस यात्रा को शीर्ष 10 नैतिक कहानियों के माध्यम से शुरू करते हैं, आइए हम खुद को प्रेरित, चुनौती और रूपांतरित होने के लिए तैयार करें। ये कहानियाँ उन मूल्यों की कोमल याद दिलाने का काम करती हैं जो हमें मनुष्य के रूप में परिभाषित करती हैं और हमें बेहतर कल के लिए प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। तो, आइए हम खुद को मंत्रमुग्ध करने वाली कहानियों में डुबो दें और उनमें निहित कालातीत ज्ञान की खोज करें, जो हमें खुद के बेहतर संस्करण बनने के करीब ले जाए।

1.  विद्या का घमण्ड

विद्या का घमण्ड
विद्या का घमण्ड

बहुत दिनों की बात है। किसी शहर में रमन, घीसा और राका तीन चोर रहते थे। तीनों को थोड़ा-थोड़ा विद्या का ज्ञान था। तीनों चोरों को विद्या का ज्ञान प्राप्त होने के कारण बहुत घमण्ड था। विद्या द्वारा तीनों चोर शहर में बड़े-बड़े लोहे की तिजोरियों को तोड़ देते थे और बैंकों को लूट लिया करते थे। इस तरह तीनों चोरों ने शहर के लोगों की नाक में दम कर रखा था।

एक बार तीनों चोरों ने एक बड़े बैंक में डकैती करके सारा माल उड़ा दिया । तब पुलिस को खबर हुई तो तीनों चोरों को पकड़ने के लिए तलाश करने लगी। मगर तीनों चोर पास ही के एक घने जंगल में भाग गए।

तीनों चोरों ने देखा कि जंगल में बहुत-सी हड्डियां बिखरी पड़ी हैं। रमन ने अनुमान लगाकर कहा- ‘ये तो किसी शेर की हड्डियां हैं। मैं चाहूं तो सभी हड्डियों को अपनी विद्या के ज्ञान दवारा जोड़ सकता हूं। घीसा को भी विद्या का घमंड था सो वह बोला ‘अगर ये शेर की हड्डियां हैं तो मैं इनको अपनी विद्या दद्वारा शेर की खाल तैयार कर उसमें डाल सकता हूं।’ रमन और घीसा की बात सुनकर राका का भी घमझड़ उमड़ पड़ा और उसने कहा तुम दोनों इतना काम कर सकते हो तो मैं भी अपनी विद्या द्वारा इसमें प्राण डाल सकता हूँ।”

तीनों चोर अपनी विद्या का प्रयोग करने लगे। कुछ देर बाद रमन ने सारी हड्डियों को जोड़ दिया और घीसा ने शेर की हुबहू जान डाल दी। थोड़ी देर में तीनों चोर सामने एक जीवित भयानक शेर को देखकर थर-थर कांपने लगे। मगर शेर के पेट में तो एक दाना नहीं था। वह भूख के मारे गरजता हुआ तीनों चोरों पर हमला कर बैठा और मारकर खा गया। शेर मस्त होकर घने जंगल की ओर चल दिया।

शिक्षा : इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि कभी घमण्ड नहीं करना चाहिए। घमण्डी को हमेशा दुख का ही सामना करना पड़ता है। यदि तीनों चोर अपनी विद्या का घमण्ड न करते तो उन्हें जान से हाथ न घोने पड़ते ।

2. मूर्ख बंदर

मूर्ख बंदर
मूर्ख बंदर

बहुत पहले की बात है- एक राजा ने अपनी सेना सहित किसी नगर के बाहर पड़ाव डाला। वहां पेड़ पर बैठा एक बंदर गौर से उनकी तमाम गतिविधियां देख रहा था। ‘मैं कई दिनों से भूखा हूँ, किंतु लगता है कि अब मुझे भरपेट खाने को मिलेगा।’ यह सोचकर वह मन-ही-मन हर्षित हुआ।

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थोड़ी देर बाद एक सिपाही दूसरे सिपाही से बोला, ‘चलो, घोड़ों के लिए कुछ चने भून लें।”

‘हा, मेरा भी यही विचार था। दूसरे सिपाही ने ‘हां’ में हां मिलाई ।

फिर सिपाहियों ने चने भूनकर ठंडे होने के लिए एक बड़े कड़ाहे में डाल दिए और दूसरे काम में लग गए। उधर बंदर ने सोचा कि बस यही सुनहरा अवसर है। यह पेड़ से नीचे उतरा और कड़ाहे में से मुट्ठी भर-भरकर चने खाने लगा ।

उसने भरपेट चने खाए जिससे उसकी भूख तो मिट गई, किंतु लोभवश उसने कुछ चने मुंह में भरे कुछ दोनों हाथों में भर लिए और पेड़ पर चढ़ गया। तभी उसके हाथ से एक चना छूट गया और जमीन पर जा गिरा।

‘अरे! मेरा चना? वह रूआसा हो गया और बिना सोचे-विचारे ही उसने दोनों हाथों के सारे चने फेंक दिए और सिर्फ एक चने की तलाश में पेड़ से नीचे उतर आया और इधर-उधर तलाश करने लगा, उसे यहीं कहीं होना चाहिए। आखिर गया तो कहां गया? कहीं भी तो दिखाई नहीं दे रहा। हाय! मैं बाकी सारे चने भी गंवा बैठा।”

इस प्रकार वह मूर्ख बंदर एक चने के लोभ में पड़कर सारे चनों से हाथ धो बैठा।

शिक्षा : लालच का फल सदैव हानिकारक होता है।

3. शिष्यो की परिक्षा

शिष्यो की परिक्षा
शिष्यो की परिक्षा

प्रयाग में एक ऋषि का आश्रम था। उनकी एक अतिसुंदर कन्या थी । कन्या को विवाह योग्य जानकर उन्होंने अपने ही शिष्यों में से सद्गुणी शिष्य के साथ उसका विवाह करने का निर्णय किया।

दूसरे दिन ऋषि ने अपने शिष्यों को बुलाया और बोले, ‘अपनी कन्या के विवाह में देने के लिए मेरे पास स्वर्णाभूषण नहीं हैं। मेरे बच्चों, क्या तुम स्वर्णाभूषण चुराकर ला सकते

हो? पर एक बात का ध्यान रखना चोरी गुप्त रूप से ही होनी चाहिए, किसी को भी इसकी भनक नहीं पड़नी चाहिए।’ उस दिन से शिष्यों ने अपने तथा मित्रों के घर से स्वर्णनिर्मित आभूषण चुराने शुरू कर दिए और चुपचाप गुरूजी को लाकर देने लगे।

कुछ दिनों में ढेर सारे स्वर्णाभूषण एकत्रित हो गए। एक दिन ऋषि ने देखा कि उनका एक शिष्य बहुत उदास है। वह उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोले, बेटा, केवल तुम ही मेरे लिए कुछ भी नहीं ला पाए, क्या बात है?”

‘आपकी शर्त ही ऐसी है गुरूदेव कि आप गुप्त रूप से लाई गई चीज ही स्वीकार करेंगे और पाप ऐसा कर्म है जिसे गुप्त नहीं रखा जा सकता। क्योंकि दूसरों से भले ही मैं चोरी छिपा लूं, पर अपने आप से तो नहीं छिपा सकता। शिष्य ने उदास स्वर में कहा ।

ऋषि खुश हो गए और अपने उस शिष्य से बोले, मुझे अपनी कन्या के लिए तुम्हारे जैसे ही योग्य वर की तलाश थी। वत्स, मुझे धन की कोई जरूरत नहीं है। मैं तो केवल सदाचार की परीक्षा ले रहा था। मेरी कन्या के योग्य वर केवल तुम ही हो।’

ऋषि ने अन्य सभी शिष्यों को बुलाया बौर कहा तुम लोग नैतिक परीक्षा में सफल नहीं हुए। अतः चोरी की हुई सभी चीजें तुम्हें उनके मालिकों को वापस करनी होंगी।’

फिर उन्होंने रत्नाभूषणों से सज्जित अपनी कन्या का विवाह अपने सद्गुणी शिष्य के साथ कर दिया।

शिक्षा : सदाचार ही सर्वोत्तम आभूषण है।

4. चतुर श्रृंगाल

चतुर श्रृंगाल
चतुर श्रृंगाल

श्रृंगाल की पत्नी को एक बार ताजा मछली खाने की इच्छा हुई। उससे मछली लाने का वादा करके श्रृंगाल नदी की ओर चला।

रास्तेमर वह सोचता रहा, ‘मैं अपना वायदा कैसे पूरा करू?”

तभी उसे दो ऊदबिलाव एक बड़ी मछली घसीटते हुए नजर आए। वह उनके पास गया। इधर दोनों ऊदबिलाव इस दुविधा में थे कि इतनी बड़ी मछली को वह कैसे बांटें? काफी देर तक दोनों में बहस होती रही।

उधर श्रृगाल उनके और करीब आया और पूछा, ‘क्या बात है दोस्तों?”

‘मित्र, हमने मिलकर यह मछली पकड़ी है। अब दुविधा यह है कि इसका बंटवारा कैसे करें? क्या तुम हमारी मदद कर सकते हो ?

‘क्यों नहीं। बंटवारा करना तो मेरे बाएं हाथ का खेल है।”

तब श्रृंगाल ने मछली का सिर और पूंछ काट डाली, सिर तुम लो और पूंछ तुम लो। दोनों ऊदबिलाव सोचने लगे कि कितना निष्पक्ष है यह। अब देखते हैं कि शेष हिस्से का बंटवारा कैसे करता है?

‘और यह शेष भाग मेरा मेहनताना है।’ उनके देखते-ही-देखते वह मछली का बड़ा हिस्सा लेकर वहां से चंपत गया। छोनों ऊदबिलाव सिर पर हाथ रखकर बैठ गए। हमारी स्वादिष्ट मछली हाथ ने निकल गई। पहला ऊदबिलाव बोला।

काश! हम झगड़ते नही तो मछली का एक बड़ा हिस्सा न गंवाना पड़ता।”

शिक्षा : आपसी फूट से अपनी ही हानि होती है।

5. सच्ची मित्रता

सच्ची मित्रता
सच्ची मित्रता

एक जंगल में झील किनारे कछुआ, कठफोड़वा व हिरण मित्र भाव से रहते थे ।

एक दिन एक शिकारी ने उनके पैरों के निशान देखकर उनके रास्तेवाले पेड से एक फंदा लटका दिया और अपनी झोंपड़ी में चला गया।

थोड़ी ही देर बाद हिरण मस्ती में झूमता हुआ उधर ने निकला और फंदे में फंस गया।‘ बचाओ।’ वह जोर से चिल्लाया।

उसकी पुकार सुनकर कठफोड़वा के साथ कछुआ आ गया।कठफोड़वा बोला, “मित्र तुम्हारे दांत मजबूत हैं। तुम इस फंदे को काटो में शिकारी का रास्ता रोकता हूं।’

कछुआ फंदा काटने में लग गया। उधर कठफोड़वा शिकारी की झोपडी की तरफ उड़ चला और मानस बनाया कि जैसे ही शिकारी झोपडी से बाहर निकलेगा, वह उसे चोंच मारकर लहूलुहान कर देगा।

उधर शिकारी ने भी जैसे ही हिरण की चीख सुनी तो उसने समझ लिया कि वह फंदे में फंस चुका वह तुरत झोपड़ी से बाहर निकला और पेड़ की ओर लपका।।

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लेकिन कठफोड़वे ने उसके सिर पर चोंच मारनी शुरू कर दी। शिकारी अपनी जान बचाकर फिर झोपडी में भागा और झोंपड़ी के पिछवाड़े से निकलकर पेड की ओर बढ़ा।

कठफोड़वा उससे पहले ही पेड़ के पास पहुंच गया। उसने देखा कि कछुआ अपना काम कर चुका था। उसने हिरण और कछुए से कहा, मित्रों जल्दी से भागो। शिकारी आने ही वाला होगा।’

यह सुनकर हिरण वहां से भाग निकला। लेकिन कछुआ शिकारी के हाथ लग गया। शिकारी ने कछुए को थैले में डाल लिया, और बोला इसकी वजह से हिरण मेरे हाथ से निकल गया। आज इसको ही मारकर खाऊंगा।

उधर हिरण ने सोचा उसका मित्र पकड़ा गया है। उसने मेरी जान बचाई थी. अब मेरा भी फर्ज बनता है कि मैं उसकी मदद करूं। यह सोचकर वह शिकारी के रास्ते में आ गया।

शिकारी ने हिरण को देखा तो थैले को वहीं फेंककर वह हिरण के पीछे भागा। हिरण अपनी पुरानी खोह की ओर भाग छूटा। शिकारी उसके पीछे-पीछे था।

भागते-भागते हिरण अपनी खोह में घुस गया। उसने सोचा एक बार शिकारी इस खोह में घुस गया तो उसका बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। थोड़ी ही देर में शिकारी खोह के पास पहुंचा। उसने सोचा अब हिरण भागकर कहां जाएगा। अब तो वह फंस ही गया है और वह भी खोह के अंदर घुस गया। खोह के अंदर भुल भुलैयावाला रास्ता था। शिकारी उन रास्तों में फंस गया।

हिरण दूसरे रास्ते से निकलकर थैले के पास जा पहुंचा और कछुए को आजाद कर दिया। उसके बाद वे तीनों मित्र वहां से सही-सलामत निकल गए।

शिक्षा: सच्चा मित्र वही जो मुसीबत में काम आए।

6. लालची कौआ

लालची कौआ
लालची कौआ

कंचनपुर के धनी व्यापारी के रसोईघर में एक कबूतर ने घोंसला बनाया हुआ था।

एक दिन एक लालची कौवा उधर आ निकला। वहां मछली को देखकर उसके मुंह में पानी आ गया। मुझे इस रसोईघर में घुसना तो चाहिए, पर कैसे?

तभी उसकी निगाह कबूतर पर जा पड़ी। उसने सोचा यदि मैं कबूतर से दोस्ती कर लू तो शायद बात बन जाए।

कबूतर जब दाना चुगने बाहर निकला तो कौआ उसके साथ लग गया। थोड़ी ही देर बाद कबूतर ने जब पीछे मुड़कर देखा तो अपने पीछे कौवे को पाया। उसने कौवे से पूछा, तुम मेरे पीछे क्यों लगे हो?’

तुम मुझे अच्छे लगते हो। इसलिए तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ।” कौवे ने मीठे स्वर में कहा।

‘बात तो तुम ठीक कह रहे हो, मगर हमारा तुम्हारा भोजन अलग-अलग है। में बीज खाता हूँ और तुम कीड़े। कबूतर ने कहा।

कोई बात नहीं हम इकट्ठे रह लेंगे। कौवे ने चापलूसी की। शाम को दोनों पेट भरकर वापस आए।

व्यापारी ने कबूतर के साथ कौवे को भी देखा तो सोचा कि शायद यह कबूतर का मित्र होगा। उसने दूसरा घोंसला रसोई में कौवे के लिए लगा दिया।

एक दिन व्यापारी ने रसोइए ने कहा, ‘आज कुछ मेहमान आ रहे हैं। उनके लिए स्वादिष्ट मछलियां बनाना।’

कौवा यह सब बातें सुन रहा था। रसोइए ने स्वादिष्ट मछलियां बनाई। तभी कबूतर कौवे से बोला, ‘चलो हम भोजन करने बाहर चलते हैं।

मक्कार कौवे ने कहा, ‘आज मेरा पेटदर्द कर रहा है। इसलिए तुम अकेले ही चले जाओ।’ कबूतर भोजन की तलाश में बाहर निकल गया।

उधर कौआ रसोइए के बाहर निकलने का इंतजार कर रहा था। जैसे ही रसोइया बाहर निकला, कौआ तुरंत रसोई की ओर झपटा और मछली का टुकड़ा मुंह में भरकर अपने घोंसले में जा बैठा और खाने लगा।

रसोइए को जब रसोई में खटपट की आवाज सुनाई दी तो वह वापस रसोई की ओर लपका। उसने देखा कौआ अपने घोसले में बैठा मछली का टुकड़ा मजे से खा रहा है।

रसोइए को बहुत गुस्सा आया और उसने कौवे की गरदन पकड़कर मरोड़ दी।

शाम को जब कबूतर दाना चुगकर आया तो उसने कौवे का हश्र देखा। जब उसने घोंसले में मछली का अधखाया टुकड़ा देखा तो उसकी समझ में आ गया कि उसने जरूर लालच किया होगा तभी उसकी यह हालत हुई है।

शिक्षा : लालच के वशीभूत होकर प्राणों को संकट में डालनेवाले से बड़ा मूर्ख और काई नहीं ।

7. लल्लू को मिला सबक

लल्लू को मिला सबक
लल्लू को मिला सबक

वर्षों पहले अनुपुर में धनीराम नाम का एक व्यापारी रहा करता था। उसके पास एक गधा था। वह उसे लल्लू के नाम से पुकारा करता था। धनीराम नमक की बोरी गधे पर लादकर शहर को ले जाया करता था। शहर जाने के लिए उसे नदी पार करनी होती थी। लम्बे समय से एक ही रास्ते से रोज आने जाने के कारण लल्लू रास्ता अच्छी तरह से पहचान गया था।

धनीराम को जब विश्वास हो गया तो वो गधे पर बोरी लाद देता और उसे शहर के एक दुकानदार के पास अकेले ही भेज दिया करता था। शहर में एक व्यापारी उसकी बारी उतार लेता तो लल्लू उसी रास्ते वापिस लौट आया करता था।

एक दिन जब लल्लू पानी में उतर रहा था तो नमक की बोरी थोड़ी पानी में भग गयी जिसके कारण थोड़ा नमक पानी में घुल गया जिस से बोरी का वनज कम हो गया और लल्लू को बहुत आराम मिला। इस तरह उसे पता चल गया कि बोरी के पानी में भीग जाने के कारण बोझ कम हो जाता है तो लल्लू हर रोज यही करने लगा। एक दिन शहर के व्यापारी को पानी से भीगी बोरी को देखकर थोड़ा शक हुआ तो उसने उसे तौल कर देखा तो नमक कम निकला इस पर उसने एक कागज पर सारी बात लिखकर बोरी में रख दिया।

यह सुनकर धनीराम चौक गया और उस दिन उसने गधे की पीठ पर बोरी लादकर उसका पीछा किया तो जब उसने गधे को पानी में डुबकी लगाते हुए देखा तो वो भी उसकी सारी चालाकी समझ गया और इस पर उसने अगले दिन गधे की पीठ पर नमक की जगह कपास रखी और उसे खाना कर दिया। गधे ने इस बार पहले की तरह, जैसे ही पानी में डुबकी लगायी तो वनज कम होने की जगह और बढ़ गया। अब तो गधे से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। जैसे-तैसे वो पानी में से निकला और पहुंचा।

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फिर उसने आगे से कभी ऐसा नहीं किया और धनीराम ने इस तरह आलसी गधे को अच्छा सबक सिखा दिया।

शिक्षा : आलस कभी न करे।

8. किशान के शब्द

किशान के शब्द
किशान के शब्द

एक बार एक किसान ने अपने पड़ोसी को बहुत बुरा भला कह दिया। लेकिन बाद में उसे अपनी गलती का अहसास हुआ तो वो पश्चताताप के लिए एक संत के पास गया। उसने जाकर संत से अपने शब्द वापिस लेने का उपाय पूछा ताकि उसके मन का बोझ कुछ कम हो सके।

संत ने किसान से कहा एक काम करो तुम जाकर कही से खूब सारे पंख इक्कठा कर लो और उसके बाद उन पंखों को शहर के बीचो बीच बिखेर दो।

किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंचा गया तो संत ने उस किसान से कहा –

क्या तुम ऐसा कर सकते हो कि जाकर उन पंखों को पुनः समेट के ले आ सको। इस पर किसान वापिस गया तो देखता है कि हवा के कारण सारे पंख उड़ गये है और कुछ जो बचे है वो समेटे नहीं जा सकते।

किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा तो संत ने उसे समझाया कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे शब्दों के साथ होता है। तुम बड़ी आसानी से किसी को कुछ भी बिना सोचे समझे कह सकते हो लेकिन एक बार कह देने के बाद वो शब्द वापिस नहीं लिए जा सकते। ठीक ऐसे ही जैसे एक बार बिखेर देने के बाद पंखों को वापिस नहीं समेटा जा सकता। तुम चाह कर भी उन शब्दों को वापिस नहीं ले सकते, इसलिए आज के बाद कभी भी किसी से कुछ कहने से पहले विचार कर बोलना ।

9. डर के आगे जीत हे

डर के आगे जीत हे
डर के आगे जीत हे

बहुत समय पुरानी बात है, एक बहुत घना जंगल हुआ करता था। एक बार किन्हीं कारणों से पुरे जंगल में भीषण आग लग गयी। सभी जानवर देख के डर रहे थे की अब क्या होगा ?

थोड़ी ही देर में जंगल में भगदड़ मच गयी सभी जानवर इधर से उधर भाग रहे थे पूरा जंगल अपनी-अपनी जान बचाने में लगा हुआ था। उस जंगल में एक नन्हीं चिड़िया रहा करती थी। उसने देखा कि सभी लोग भयभीत हैं। जंगल में आग लगी है, मुझे लोगों मदद करनी चाहिए।

यही सोचकर वह जल्दी ही पास की नदी में गयीं और चोच में पानी भरकर लाई और आग में डालने लगी। वह बार-बार नदी में जाती और चोच में पानी डालती। पास से ही एक उल्लू गुजर रहा था उसने चिड़िया की इस हरकत को देखा और म नहीं मन सोचने लगा बोला कि ये चिड़िया कितनी मूर्ख है इतनी भीषण आग को ये चोंच में पानी भरकर कैसे बुझा सकती है।

यही सोचकर वह चिडिया के पास गया और बोला कि तुम मूर्ख हो इस तरह से आग नहीं बुझाई जा सकती है।

चिड़िया ने बहुत विनम्रता के साथ उत्तर दिया “मुझे पता है कि मेरे प्रयास से कुछ – नहीं होगा लेकिन मुझे अपनी तरफ से अच्छा करना है, आग कितनी भी भयंकर हो लेकिन मैं अपना प्रयास नहीं छोडूंगी।’

उल्लू यह सुनकर बहुत प्रभावित हुआ।

शिक्षा : परेशानी आने पर डरे नहीं, बिना घबराये प्रयास करते रहे।

10. सोने का अण्डा

रामपुर गाँव में एक गरीब किसान रहता था। वह रोज की ही तरह अपने खेतों से काम करके घर वापस आ रहा था।

उसे रास्ते में एक घायल मुर्गी दिखाई देती है जिसके काफी खून निकल रहा था। गरीब किसान ने उसके देखते ही उठाया और घर ले जाकर उसकी मरहम पट्टी की। कुछ ही दिनों में मुर्गी पूरी तरह से स्वस्थ हो गयी।

मुर्गी ने गरीब किसान से कहा कि तुमने मेरी इतनी सेवा की है इसके बदले में मै तुम्हें रोज एक सोने का अण्डा दूंगी।

मुर्गी अपने कहे अनुसार रोज सुबह एक सोने का अण्डा देती जिसे गरीब किसान बाजार ले जाकर अच्छे दामों में बेच दिया करता था।

देखते ही देखते गरीब किसान के पास काफी पैसे हो गये, अब वह बहुत अमीर हो गया था।

एक दिन उसने सोचा कि मुझे रोज मुर्गी को खाना देना होता है, उसकी सेवा करनी पड़ती है तब एक सिर्फ एक अण्डा मुझे मिल पाता है क्यों न मैं इसके पेट से सारे अण्डे एक साथ निकालकर बेच दूं।

ऐसा सोचकर उसने मुर्गी का पेट चाकू से काट दिया परन्तु उसे एक भी अण्डा नही मिला और जो एक अण्डा रोज मिलता था वह उससे भी हाथ धो बैठा।

शिक्षा : सोने का अण्डा कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ज्यादा हमें ज्यादा लालच नहीं करना चाहिए। लालच में कई बार हम खुद का ही नुकसान कर बैठते हैं।

 

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FAQs: Top 10 Moral Stories in Hindi

कहानियाँ महत्वपूर्ण क्यों होती है?

कहानियाँ ज्ञानवर्धक और रोचक होती है और यह हमे ऐसे टाइम में सुनाई जाती है ताकि हमारा ज्यादा से ज्यादा विकास हो। ये हमें नई- नई सीख देती है जो जिन्दगी भर काम आ सकती है।

कहानियाँ कितने प्रकार की होती हैं?

एक रिसर्च में दावा किया गया है कि कहानियाँ सिर्फ तीन प्रकार की होती हैं जो इस प्रकार है-
1. सुखद अंत वाली
2. दुखद अंत वाली
3. त्रासदी वाली

Short Story कितने लाइन की होती है?

एक Short Story 10 से 12 लाइन की होती है और उसमें एक भावार्थ होना चाहिए।

क्या हर कहानी में एक सीख होती है?

नहीं, हर कहानी ऐसी नही होती है जिसमें कोई सीख हो। मोरल स्टोरीज में एक सीख जरूर होती है।

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