Moral Stories In Hindi For Class 5 | Top 10 Class 5 Short Moral Story

Moral Stories In Hindi For Class 5 : आज हम कक्षा 5 की कुछ मोरल कहानियों के बारे में जानेंगे। ये कहानियाँ आपने बचपन में जरूर सुनी होगी। ये हिंदी नैतिक कहानियाँ बच्चों को अच्छी शिक्षा देगी और उनके जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी होगी। आगे जेसे हमने नैतिक कहानियाँ की बात की थी| तो आए जानते है Hindi Stories For Class 5 के बारे में।

नींद की कहानियाँ एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं बच्चों की परवरिश और उनकी मनोहारी दुनिया में संतुष्टि के लिए। ये कहानियाँ रात के समय बच्चों को सुलाने के लिए सुनाई जाती हैं और उनके सपनों में चमत्कारिक रूप से जीवित हो जाती हैं।

बच्चे कहानी सुनना और पढ़ना बहोत अच्छा लगता है। नैतिक कहानियां, डरावनी नी कहानियां, बच्चों के लिए मज़ेदार कहानियाँसुपर हीरो की कहानियांरात को सोने से पहले सुननेवाली कहानियांछोटे बच्चो की कहानियां ओर भी कई तरह की कहानियां होती है। जो बच्चो को अच्छी लगती है।

Moral Stories In Hindi For Class 5 | बहुत छोटी हिंदी कहानियाँ

मैं जानता हूँ कि (Moral Stories) नैतिक कहानियाँ हमारी शिष्टता और सोच को बढ़ाती हैं। क्योंकि ज्यादा सोचना और हवा में महल बनाना किसी के लिए भी आसान नहीं है। इसलिए, हमेशा विनम्र रहें, हमेशा सही काम और चीजें करें, और अपने जीवन को स्कूल और समाज में भी बेहतर बनाएं।

Moral Stories In Hindi For Class 5 | Top 10+ Class 5 Short Moral Stories In Hindi
Moral Stories In Hindi For Class 5 | Top 10+ Class 5 Short Moral Stories In Hindi

मैं आपको बहुत विनम्रता से कहता हूँ यदि आप कक्षा 5  में हैं और अपने जीवन में कुछ विशेष के बारे में सीखना चाहते हैं तो यह नैतिक कहानियों से सीख सकते हैं। तो, कक्षा 1 के लिए हिंदी में यह लघु कथाएँ आपकी बहुत मदद करेंगी। अब नीचे स्क्रॉल करें और अभी Moral Stories in Hindi for Class 5  पढ़ें।

1. माँ का प्यार (Short Moral Stories in Hindi For Class 5)

माँ का प्यार (Short Moral Stories in Hindi For Class 5)
माँ का प्यार (Short Moral Stories in Hindi For Class 5)

एक परी थी। एक बार उसने घोषणा की,”जिस प्राणी का बच्चा सबसे ज्यादा सुंदर होगा, उसे मैं इनाम दूँगी।“

यह सुनकर सभी प्राणी अपने-अपने बच्चों के साथ एक स्थान पर जमा हो गए। परी ने एक-एक करके सभी बच्चों को ध्यान से देखा। जब उसने बंदरिया के चपटी नाकवाले बच्चे को देखा, तो वह बोल उठी,” छिः! कितना कुरूप है यह बच्चा! इसके माता-पिता को तो कभी पुरस्कार नही मिल सकता।“

परी की यह बात सुनकर बच्चे के माँ के दिल को बहुत ठेस लगी। उसने अपने बच्चे को हदय से लगा लिया और उसके कान के समीप अपना मुँह ले जाकर कहा,”तू चिंता न कर मेरे लाल! मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ। मेरे लिए तो तू ही सबसे बड़ा पुरस्कार है। मैं कोई दूसरा पुरस्कार प्राप्त करना नहीं चाहती। भगवान तुझे लंबी उम्र दे।“

शिक्षा – दुनिया की कोई चीज़ माँ के प्यार की बराबरी नहीं !

2. मूर्खता का फल (Class 5 Short Moral Stories in Hindi)

मूर्खता का फल (Class 5 Short Moral Stories in Hindi)
मूर्खता का फल (Class 5 Short Moral Stories in Hindi)

एक बढ़ई था। एक बार वह लकड़ी के लंबे लट्ठे को आरे से चीर रहा था। उसे इस लट्ठे के दो टुकडे़ करने थे। सामनेवाले पेड़ पर एक बंदर बैठा हुआ था। वह काफी देर से बढ़ई के काम को बडे़, ध्यान से देख रहा था। बढ़ई ने दोपहर का भोजन करने के लिये काम बंद कर दिया। अब तक लट्ठे का केवल आधा ही भाग चीरा जा चुका था। इसलिए उसने लट्ठे के चिरे हुए हिस्से में एक मोटी सी गुल्ली फँसा दी। इसके बाद वह खाना खाने चला गया।

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बढ़ई के जाने के बाद बंदर पेड़ से कूदकर नीचे आया। वह कुछ देर तक इधर-उधर देखता रहा। उसकी नजर लकड़ी की गुल्ली पर गड़ी हुई थी। वह गुल्ली के पास गया और उसे बड़ी उत्सुकता से देखने लगा। वह अपने दोनों पाँव लट्ठे के दोनों ओर लटकाकर उस पर बैठ गया। इस तरह बैठने से उसकी लंबी पूँछ लकडी के चिरे हुए हिस्से में लटक रही थी। उसने बड़ी उत्सुकता से गुल्ली को हिलाडुला कर देखा फिर वह उसे जोर-जोर से हिलाने लगा। अंत में जोर लगा कर उसने गुल्ली खींच निकाली।

ज्योंही गुल्ली निकली की लट्ठे के दोनो चिरे हुए हिस्से आपस में चिपक गये। बंदर की पूँछ उसमे बुरी तरह से फंस गयी। दर्द के मारे बंदर जोर-जोर से चिल्लाने लगा। उसे बढ़ई का डर भी सता रहा था। वह पूँछ निकालने के लिए छटपटाने लगा। उसने जोर लगाकर उछलने की कोशिश की, तो उसकी पूँछ टूट गयी। अब वह बिना पूँछ का हो गया।

शिक्षा – अनजानी चीजो से छेड़छाड़ करना खतरनाक होता है।

3. बादाम किसे मिले (Short Stories in Hindi for Class 5)

बादाम किसे मिले (Short Stories in Hindi for Class 5)
बादाम किसे मिले (Short Stories in Hindi for Class 5)

एक दिन दो लड़के सड़क के किनारे किनारे जा रहे थे। तभी उन्हे जमीन पर गिरा हुआ एक बादाम दिखाई दिया। दोनो उस बादाम को लेने के लिए दौड़ पड़े। बादाम उनमे से एक लड़के के हाथ लगा। दूसरे लड़के ने कहा, “यह बादाम मेरा है। क्योंकि सबसे पहले मैने इसे देखा था।”

यह मेरा है। बादाम लेनेवाले लड़के ने कहा, “क्योंकी मैंने इसे उठाया था।” इतने मे वहाँ एक चलाक लंबा सा लड़का आ पहुँचा।

उसने दोनो लड़को से कहा, “बादाम मुझे दो। मैं तुम दोनो का झगड़ा निपटा देता हूँ।” लंबे लड़के ने बादाम ले लिया उसने बदाम को फोड़ डाला। उसके कठोर छिलके के दो टुकड़े कर दिये। छिलके का आधा हिस्सा एक लड़के को देकर उसने कहा, “लो यह आधा भाग तुम्हारा दूसरा भाग दूसरे लड़के के हाथ मे थमाकर बोला और यह भाग तुम्हारा। फिर लंबे लड़के ने बादाम की गिरी मुहँ मे डालते हुए कहा, “यह बाकी बचा हिस्सा मैं खा लेता हूँ। क्योंकी तुम्हारा झगड़ा निपटाने मे मैंने मदद की है।

शिक्षा – दो के झगड़े मे तीसरे का फायदा।

4. बंदर का इंसाफ (Short Moral Stories in Hindi For Class 5)

दो बिल्लियाँ थीं। उन्हे एक दिन रास्ते पर एक केक दिखाई दिया। एक बिल्ली ने उछल कर फौरन उस केक को उठा लिया। दूसरी बिल्ली उससे केक छीनने लगी। पहली बिल्ली ने कहा, चल हट! यह केक मेरा है पहले मैंने ही इसे उठाया है। दूसरी बिल्ली ने कहा, इसे पहले मैने देखा था, इसलिए यह मेरा हुआ।

उसी समय वहाँ से एक बंदर जा रहा था। दोनो बिल्लियो ने उससे प्रार्थना की, भाई तुम्हीं निर्णायक बनो और हमारा झगड़ा निपटाओ। बंदर ने कहा, लाओ यह केक मुझे दो। मैं इसके दो बराबर-बराबर हिस्से करूँगा और दोनों को एक-एक हिस्सा दे दूँगा। बंदर ने केक के दो दुकड़े किये। उसने दोनो टुकड़ो को बारी-बारी से देखा।

फिर अपना सिर हिलाते हुए कहा, दोनो टुकड़े बराबर नही हैं। यह टुकड़ा दूसरे टुकड़े से बड़ा है। उसने बड़े टुकड़े से थोड़ा हिस्सा खा लिया। दोनो हिस्से बराबर नही हुए। बंदर ने फिर बड़े हिस्से में से थोड़ा खा लिया। बंदर बार-बार बड़े टुकड़े में से थोड़ा-थोड़ा खाता रहा। अंत मे केक के केवल दो छोटे-छोटे टुकड़े बचे।

बंदर नें बिल्लयो से कहा, ओ-हो-हो! अब भला इतने छोटे-छोटे टुकड़े मैं तुम्हे कैसे दे सकता हूँ? चलो मैं ही खा लेता हूँ। यह कहकर बंदर केक के दोनो टुकड़े मुँह में डालकर चलता बना।

शिक्षा – दो की लड़ाई में तीसरे का फायदा।

5. मधुमक्खी और कबूतर (Moral Story in Hindi)

एक मधुमक्खी थी। एक बार वह उड़ती हुई तालाब के ऊपर से जा रही थी। अचानक वह तालाब के पानी में गिर गई। उसके पंख गीले हो गए। अब वह उड़ नहीं सकती थी। उसकी मृत्यु निश्चित थी। तालाब के पास पेड़ पर एक कबूतर बैठा हुआ था। उसने मधुमक्खी को पानी में डूबते हुए देखा। कबूतर ने पेड़ से एक पत्ता तोड़ा। उसे अपनी चोंच में उठाकर तालाब में मधुमक्खी के पास गिरा दिया।

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धीरे-धीरे मधुमक्खी उस पत्ते पर चढ़ गई। थोड़ी देर में उसके पंख सूख गये। उसने कबूतर को धन्यवाद दिया। फिर वह उड़ कर दूर चली गई। कुछ दिन के बाद कबूतर पर एक संकट आया। वह पेड़ की डाली पर आँख मूंद कर सो रहा था। तभी एक लड़के ने गुलेल से उस पर निशाना साधा। कबूतर इस खतरे से अनजान था। मगर मधुमक्खी ने लड़के को निशाना साथते हुए देख लिया था।

मधुमक्खी उड़कर लड़के के पास पहुँची। उसने लड़के के हाथ में काट लिया। लड़के के हाथ से गुलेल गिर पड़ी। दर्द के मारे वह जोर-जोर से चीखने लगा। लड़के की चीख सुनकर कबूतर जाग उठा। उसने अपनी जान बचाने के लिए मधुमक्खी को धन्यवाद दिया और मजे से उड़ गया।

शिक्षा – अच्छे लोग हमेशा दूसरों की मदद करते है।

6. साहूकार का बटुआ (Class 5 Short Moral Stories in Hindi)

एक बार एक ग्रामीण साहूकार का बटुआ खो गया। उसने घोषणा की कि जो भी उसका बटुआ लौटाएगा, उसे सौ रूपए का इनाम दिया जाएगा। बटु्आ एक गरीब किसान के हाथ लगा था। उसमें एक हजार रूपए थे। किसान बहुत ईमानदार था। उसने साहकार के पास जाकर बटुआ उसे लौटा दिया।

साहूकार ने बटुआ खोलकर पैसे गिने। उसमे पूरे एक हजार रूपये थे। अब किसान को इनाम के सौ रूपए देने मे साहूकार आगापीछा करने लगा। उसने किसान से कहा, “वाह! तू तो बड़ा होशियार निकला! इनाम की रकम तूने पहले ही निकाल ली।” यह सुनकर किसान को बहुत गुस्सा आया।

उसने साहूकार से पूछा, “सेठजी, आप कहना क्या चाहते हैं?” साहूकार ने कहा, “मैं क्या कह रहा हूँ, तुम अच्छी तरह जानते हो। इस बटुए में ग्यारह सौ रूपए थे। पर अब इसमें किवल एक हजार रुपये ही हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि इनाम के सौ रूपए तुमने इसमें से पहले ही निकाल लिए हैं।”

किसान ने कहा, “मैंने तुम्हारे बटुए में से एक पैसा भी नहीं निकाला है। चलो, सरपंच के पास चलते हैं, वहीं फैसला हो जाएगा।” फिर वे दोनों सरपंच के पास गए। सरपंच ने उन दोनों की बातें सुनीं । उसे यह समझते देर नहीं लगी कि साहूकार बेईमानी कर रहा है।

सरपंच ने साहकार से कहा, “आपको पूरा यकीन है कि बटुए में ग्यारह सौ रूपए थे?” साहूकार ने कहा, “हाँ मुझे पूरा यकीन है।” सरपंच ने जवाब दिया, “तो फिर यह बटुआ आपका नहीं है।” और सरपंच ने बटुआ उस गरीब किसान को दे दिया।

शिक्षा – झूठ बोलने की भारी सजा भुगतनी पड़ती है।

7. भेड़ चरानेवाला लड़का और भेड़िया (Hindi Short Stories)

एक भेड़ चरानेवाला लड़का था। वह रोज भेड़ों को चराने के लिए जंगल में ले जाता था। जंगल में वह अकेला होता था। इसलिए उसका मन नही लगता था। एक दिन उसे मजाक करने की सूझी। वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा, “बचाओ बचाओ भेड़िया आया भेड़िया आया।” आसपास के खेतों में किसान काम कर रहे थे। उन्होंने लड़के की आवाज सुनी वे अपना-अपना काम छोड़कर लड़के की मदद के लिए दौड़ पड़े।

जब लड़के के पास पहुँचे। तो उन्हें कहीं भेड़िया दिखाई नही दिया। किसानों ने लड़के से पूछा, “भेड़िया तो कहीं है नही फिर तुमने हमे क्यों बुलाया?”, लड़का हँसने लगा उसने कहा, “मैं तो मजाक कर रहा था। भेड़िया आया ही नही था। जाओ-जाओ तुम लोग।” किसानों ने लड़के को खूब डाटा फटकारा इसके बाद वे लौट गए। एक बार लड़के ने फिर ऐसा ही मजाक किया। आसपास के किसान मदद के लिए दौड़ आए।

लड़के के इस मजाक पर उन्हें बहुत गुस्सा आया लड़के को डाट फटकार कर चले गए। कुछ समय बाद एक दिन सचमुच भेड़िया आ पहुँचा। भेड़ चरानेवाला लड़का दौड़कर पेड़ पर चढ़ गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा। पर इस बार उसकी मदद के लिए कोई नही आया। सभी ने यही सोचा कि वह बदमाश लड़का पहले की तरह मजाक कर रहा है। भेड़िए ने कई भेड़ो को मार डाला। इससे लड़के को अपने किए पर बड़ा दुख हुआ।

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शिक्षा – झूठे आदमी की सच्ची बातों पर भी लोग विश्वास नही करते।

8. मछुवा और मंत्री (Moral Stories in Hindi for class 5)

एक राजा था। उसे रोज तुरंत पकड़ी गई मछलियाँ खाने का शौक था। एक दिन समुद्र में भयंकर तूफान आया। कोई भी मछुआ समुद्र में मछली मारने नही गया। इसलिए राजा को तुरंत पकड़ी हुई मछली नही मिल सकी। राजा ने घोषणा करा दी। कि उस दिन जो भी तुरंत पकड़ी हुई मछली राजा के पास लाएगा। उसे भरपूर इनाम दिया जाएगा। एक गरीब मछुए ने यह घोषणा सुनी जान जोखिम में डालकर समुद्र से मछलियाँ पकड़ी और राजमहल पहुँचा राजमहल के पहरेदारो ने उसे फाटक पर रोक दिया वे उसे राजा के मंत्री के पास ले गए।

मंत्री ने मछुए से कहा, “मैं तुम्हे राजा के पास जरूर जाने दूँगा पर तुम्हे राजा से जो ईनाम मिलेगा। उस में आधा हिस्सा होगा।” मछुए को मंत्री का यह प्रस्ताव पसंद नही आया। फिर भी उसने मन मारकर उसे स्वीकार किया।

इसके बाद पहरेदार उसे लेकर राजा के पास गए। मछुए ने राजा को मछलियाँ दी। राजा मछुए पर बहुत प्रसन्न हुआ। बताओ क्या इनाम चाहिए। तुम जो माँगोगे वह मैं तुम्हे अवश्य दूँगा। मछुए ने कहा, “महाराज मैं चाहता हूँ मेरी पीठ पर पचास कोड़े लगाए जाएँ। बस मुझे यही इनाम चाहिए।” मछुए की यह बात सुनकर सभी दरबारी चकित रहगए। राजा ने मछुए की पीठ पर पचास हल्के कोड़े लगाने का आदेश दिया जब नौकर मछुए की पीठ पर पच्चीस कोड़े लगा चुका। तो मछुए ने कहा, “रूको! अब बाकी के पच्चीस कोड़े मेरे साझेदार की पीठ पर लगाओ।” राजा ने मछुए से कहा, “तुम्हारा हिस्सेदार कौन है?”

मछुए ने कहा,”महाराज आपके मंत्री महोदय ही मेरे हिस्सेदार है।”

मछुए का जवाब सुनकर राजा गुस्से से तमतमा उठा। उसने मंत्री को अपने सामने हाजिर करने का आदेश दिया।

मंत्री के सामने आते ही राजा ने नौकर को आदेश दिया इन्हे गिनकर पच्चीस कोड़े लगाओ ध्यान रखो। इनकी पीठ पर कोड़े जोर जोर से लगने चाहिए। इसके बाद राजा ने बेईमान मंत्री को जेल मे डाल दिया। फिर राजा ने मछुए को मुँहमाँगा इनाम दिया।

शिक्षा – जैसी करनी वैसी भरनी।

9. हाथी और उसके दोस्त (Moral Stories in Hindi)

Moral Stories In Hindi For Class 5: एक बार की बात है, एक अकेला हाथी एक अनजान जंगल में घुस गया। यह उसके लिए नया था, और वह दोस्त बनाना चाह रही थी। वह एक बंदर के पास गई और बोली, “नमस्ते बंदर! क्या आप मेरी दोस्त बनना चाहेंगी?” बंदर ने कहा, “तुम मेरी तरह झूलने के लिए बहुत बड़े हो, इसलिए मैं तुम्हारा दोस्त नहीं बन सकता।” हाथी फिर एक खरगोश के पास गया और वही सवाल पूछा।

खरगोश ने कहा, “तुम मेरे बिल में फिट होने के लिए बहुत बड़े हो, इसलिए मैं तुम्हारा दोस्त नहीं बन सकता।” हाथी भी तालाब में मेंढक के पास गया और वही सवाल किया। मेंढक ने उत्तर दिया, “तुम मेरे जितना ऊंचा कूदने के लिए बहुत भारी हो, इसलिए मैं तुम्हारा मित्र नहीं हो सकता।”

हाथी वास्तव में उदास था क्योंकि वह मित्र नहीं बना सका। फिर, एक दिन, उसने सभी जानवरों को जंगल की ओर भागते हुए देखा, और उसने एक भालू से पूछा कि यह क्या हो रहा है। भालू ने कहा, “शेर बाहर खुले में है – वे खुद को बचाने के लिए इससे भाग रहे हैं।” हाथी शेर के पास गया और बोला, “कृपया इन निर्दोष लोगों को चोट न पहुँचाएँ। कृपया उन्हें अकेला छोड़ दें। शेर ने उपहास किया और हाथी को एक तरफ जाने के लिए कहा।

तब हाथी को गुस्सा आया और उसने अपनी पूरी ताकत से शेर को धक्का देकर घायल कर दिया। अन्य सभी जानवर धीरे-धीरे बाहर आए और शेर की हार पर आनन्दित होने लगे। वे हाथी के पास गए और उससे कहा, “तुम हमारे दोस्त बनने के लिए एकदम सही आकार के हो!”

शिक्षा – किसी व्यक्ति का आकार उसके मूल्य का निर्धारण नहीं करता है।

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