Jadui Kahaniya In Hindi | Stories For Class 5 जदुई कहानियां हिंदी में

Jadui Kahaniya In Hindi | Stories For Class 5: जादुई कहानियाँ एक रंगीन और चमत्कारिक दुनिया हैं। ये कहानियाँ असलीता से दूर और सपनों की होती हैं, जहाँ नागिनें, जादूगर, परी और जादू से भरपूर विचित्र प्राणियों की दुनिया है। इन कहानियों में छुपे हुए संदेश और यहाँ तक कि जीवन के असली मूल्य को समझाने वाली कठिनाइयों से सुनहरा मार्ग दिखाती हैं। इन कहानियों का चार्मिंग माहौल, जोरदार प्रभावी वर्णन और आश्चर्यजनक घटनाओं के साथ, पढ़ने वालों के दिमाग मे जादू भर देता है। चाहे बच्चे हों या बड़े, जादुई कहानियाँ हमेशा लोगों को खोज, सीख और मनोरंजन का एक अद्वितीय साधन रही हैं।

नींद की कहानियाँ एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं बच्चों की परवरिश और उनकी मनोहारी दुनिया में संतुष्टि के लिए। ये कहानियाँ रात के समय बच्चों को सुलाने के लिए सुनाई जाती हैं और उनके सपनों में चमत्कारिक रूप से जीवित हो जाती हैं।

Jadui Kahaniya In Hindi | Stories For Class 5 जदुई कहानियां हिंदी में
Jadui Kahaniya In Hindi | Stories For Class 5 जदुई कहानियां हिंदी में

Jadui Kahaniya In Hindi | stories for class 5

बच्चे कहानी सुनना और पढ़ना बहोत अच्छा लगता है। नैतिक कहानियां, डरावनी नी कहानियां, बच्चों के लिए मज़ेदार कहानियाँ, सुपर हीरो की कहानियां, जादुई परियों की कहानी, रात को सोने से पहले सुननेवाली कहानियांछोटे बच्चो की कहानियां ओर भी कई तरह की कहानियां होती है। जो बच्चो को अच्छी लगती है।

1. लाल परी की कहानी | Moral Stories In Hindi For Class 5th

लाल परी की कहानी | Moral Stories In Hindi For Class 5th
लाल परी की कहानी | Moral Stories In Hindi For Class 5th

सालों पहले परियों की नगरी में लाल परी रहती थी। कुछ दिनों बाद महल में एक जश्न मनाने के लिए सब तैयार हो गईं। तभी किसी बात पर रानी परी ने लाल परी को महल से बाहर निकल जाने का आदेश दे दिया। इस बात से उदास होकर लाल परी महल से उड़कर धरती पर आकर एक बाग में छिप गई। उस बाग में बहुत सारे बच्चे खेल खेल रहे थे। लाल परी छिपकर उन बच्चों का खेल देखने लगी और उन बच्चों को हंसता-खेलता देखकर वह अपना दुख भी भूल गई।

तभी, बाग में खेल रही सोनी नाम की एक लड़की की नजर लाल परी के सुनहरे लाल पंखों पर पड़ गई। सोनी को लगा कि शायद यह कोई फल है और वह उसे लेने के लिए उसके पास चली गई। सोनी ने वहां पर जब लाल परी को देखा, तो वह चौंक गई और खुशी के मारे चिल्लाने लगी।

सोनी की चीख सुनकर बाग में खेल रहे सभी बच्चे भी उसके पास आ गए। सुंदर लाल परी ने लाल रंग के कपड़े पहने हुए थे। उसके पंख भी लाल थे और उसने चमकता हुआ लाल रंग का सिर पर ताज भी पहना हुआ था। सब बच्चों को देखकर लाल परी ने सबको अपना परिचय दिया। यह सुनते ही सारे बच्चे खुश हो गए और उछलकूद करने लगे।

बच्चों ने दादी से कहानी में सुना था कि लाल परी सारी मनोकामनाएं पूरी करती है। इसी वजह से सारे बच्चे लाल परी को देखकर और खुश हो गए और अपनी इच्छाएं बताने लगें। तभी चिंटू की इच्छा सुनने के बाद लाल परी ने अपनी छड़ी घुमाई और चिंटू हवा की सैर करके वापस जमीन पर आ गया।

फिर लाल परी ने अपनी छड़ी घूमाई और एक रसीला ताजा आम सोनी के हाथों में आ गया। इसके बाद लाल परी ने फिर से अपनी छड़ी घुमाई और बाग के सभी फूल रोशनी से जगमगाने लगे। लाल परी के जादू देखकर सभी बच्चे बहुत खुश थे और लाल परी भी परी महल में चल रहे उत्सव और महल में न रहने का अपना दुख भूल गई थी।

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इसके बाद जैसे ही फूलों का चमकना कम हुआ आसामन के सारे तारे चमकने लगे। फिर बच्चों ने लाल परी से विदा लिया और अपने-अपने घर जाने को तैयार हो गए। बच्चों के जाने के बाद लाल परी का मन फिर से उदास हो गया। लाल परी को उदास देखकर सोनी से रहा न गया, तो उसने उससे उसकी उदासी का कारण पूछ लिया।

लाल परी ने सोनी को रानी परी की सारी बात बता दी। यह सुनने के बाद सोनी ने कहा – “आपने कोई शरारती हरकत की होगी, तभी रानी परी ने ऐसी सजा दी है। मैं जब भी घर में शरारत करती हूं, तो मेरी मां भी मुझे कोई न कोई सजा दे देती हैं।”

सफाई देते हुए लाल परी ने कहा – “नहीं, मैंने कोई शरारत नहीं की थी।”

लाल परी की सफाई सुनकर मुस्कुराते हुए सोनी ने फिर से कहा – “कुछ तो शरारत की ही होगी!”

इतना सुनते ही लाल परी ने अपनी छड़ी और नजरें सोनी से चुरा लीं। नजरें नीची करते हुए लाल परी ने कहा – “हां, मैंने एक शरारत की थी! नोटू बौना सीढ़ी पर खड़ा होकर परी महल के सबसे ऊंची घडी की सफाई कर रहा था। मैंने सीढ़ी को हिला दिया था। डर के मारे वह घड़ी की सुई पकड़कर उसी पर लटक गया और परी महल के सबसे बड़ी घड़ी की सुई टूट गई।”

“उस घड़ी की सुई टूटने के कारण घड़ी रुक गई और परी लोक में सब रुक गया था। इसके बाद रानी परी ने अपनी जादू से सब कुछ ठीक किया और इसी वजह से गुस्सा होकर उन्होंने मुझे महल के बाहर भेज दिया। जबकि, इसमें मेरी कोई गलती नहीं, सारी गलती नोटू बौने की थी।”

लाल परी की बात सुनकर सोनी ने कहा – “मेरी मां कहती हैं कि अगर हम अंजान होकर कोई गलती करते हैं, तो उसके लिए माफ किया जा सकता है, लेकिन अगर जानबूझकर कोई गलती की जाए, तो उसके लिए सजा देनी चाहिए। तो अब आप ये बताओं कि क्या आपने उस सीढ़ी को जानबूझकर हिलाया था या गलती से?”

लाल परी ने बहुत ही धीमी आवाज में कहा – “जानबूझकर। क्या अगर मैं अब रानी परी से अपनी इस गलती के लिए माफी मांगू, तो क्या वो मुझे माफ करेंगी?”

सोनी ने कहा – “हां बिल्कुल, मेरी मां ने यह भी बताया है कि अगर कोई कार्य सच्चे मन से किया जाए, तो वह जरूर सफल होता है।”

इसके बाद लाल परी ने सोनी से कहा कि वह उसकी तरफ से उसकी मां को धन्यवाद दे और अपनी जादूई छड़ी घुमाकर अगले ही पल में सोनी को उसके घर पहुंचा दिया।

सोनी की मां के विचारों को सुनने के बाद लाल परी ने अपने में ठान लिया कि अब वह परी लोक की सबसे अच्छी परी बनेगी। इसके बाद उसने अपने दोनों पंख फैलाए और आसामन की तरफ उड़ चली रानी परी से अपनी गलती के लिए माफी मांगने के लिए। फिर परीलोक पहुंचकर उसने सच्चे मन से अपनी गलती मानकर रानी परी से माफी मांगी और उन्होंने भी उसे माफ कर दिया।

सीख – बेवजह किसी को परेशान नहीं करना चाहिए और अगर अपनी किसी गलती के लिए माफी मांगना चाहते हैं, तो उसके लिए सच्चे मन से मांफी मांग लेनी चाहिए। सच्चे मन से किया गया काम हमेशा अच्छा होता है।

2. ब्यूटी और बीस्ट की कहानी | Jadui Kahaniya In Hindi

ब्यूटी और बीस्ट की कहानी | Jadui Kahaniya In Hindi
ब्यूटी और बीस्ट की कहानी | Jadui Kahaniya In Hindi

बहुत समय पहले की बात है, एक नगर में घनश्याम नाम का व्यापारी रहता था। उसकी तीन बेटियां थीं, जिन्हें वो बहुत प्यार करता था। व्यापारी को अपनी सभी बेटियों की चिंता रहती थी, क्योंकि उसे व्यापार के लिए विदेश जाना पड़ता था। जब भी वह वापस आता था, तो अपनी बेटियों के लिए कोई न कोई उपहार जरूर लेकर आता था। तीनों में से सबसे छोटी बेटी का नाम ब्यूटी था, जो सुंदर होने के साथ ही समझदार भी थी। उसे हर कोई पसंद करता था।

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एक बार घनश्याम को व्यापार के सिलसिले में समुद्र के पार जाना पड़ा। लौटते समय एक बहुत बड़े तूफान के कारण उसका सारा कमाया हुआ धन समुद्र में डूब गया। जैसे-तैसे वह अपनी जान बचाकर एक टापू पर पहुंचा, जहां उसे एक बड़ा-सा महल दिखा। वह महल के दरवाजे के पास पहुंचा। दरवाजा जादुई था, तो वह अपने आप खुल गया और व्यापारी महल के अंदर चला गया। महल अंदर से बहुत सुंदर था और उसके बीचों बीच एक बड़ी मेज पर बहुत सारा खाना रखा हुआ था।

व्यापारी को तेज भूख लगी थी, तो उसने मेज से एक सेब उठाकर खा लिया। तभी वहां एक बीस्ट यानी राक्षस के हंसने की आवाज आने लगी। व्यापारी आवाज सुनकर डर गया और छुपने लगा। तभी बीस्ट ने कहा कि डरो नहीं आप हमारे मेहमान हैं। आराम से खान खाकर आप जा सकते हैं। बीस्ट के व्यवहार से व्यापारी बहुत खुश हुआ और उसने पेट भरकर खाना खाया और उसे धन्यवाद कहकर जाने लगा।

महल से बाहर निकलते हुए व्यापारी की नजर एक गुलाब पर पड़ी। उसने गुलाब को उठाने की कोशिश की। यह देखकर बीस्ट को गुस्सा आया और वह व्यापारी पर चिल्लाने लगा। उसने कहा कि तुमने बहुत बड़ी गलती की है और इसकी सजा तुमको मिलेगी। अब तुम्हें जीवन भर यहां रहना पड़ेगा।

यह सुनकर व्यापारी डर गया और उसने कहा कि मुझे माफ कर दो। घर में तीन बेटियां मेरा इंतजार कर रही हैं। मेरे अलावा उनका कोई नहीं है। तब बीस्ट ने कहा कि यदि तुमको यहां नहीं रहना है, तो तुम्हारी जगह किसी और को यहां रहने के लिए भेज दो।

व्यापारी दुखी होकर अपने घर चला गया और उदास रहने लगा। उसकी उदासी देखकर तीनों बेटियों ने कारण पूछा। तब घनश्याम ने राक्षस के महल की पूरी बात बता दी। पिता की बात सुनकर ब्यूटी कहती है कि वो महल जाने के लिए तैयार है। घनश्याम ने उसे समझाना चाहा कि ऐसे ही किसी महल में जाकर रहना अच्छा नहीं होगा। उसका पूरा जीवन बर्बाद हो जाएगा। ब्यूटी ने पिता की बात बिल्कुल नहीं सुनी। मजबूर होकर घनश्याम ने बीस्ट के महल में अपनी सबसे छोटी बेटी को भेज दिया।

महल जाकर ब्यूटी ने सभी को अपने स्वभाव से दोस्त बना लिया। बीस्ट भी उससे खुश था। थोड़े समय बाद बीस्ट को ब्यूटी पसंद आने लगी थी और वो उससे शादी करने के सपने देखने लगा। यह सपना देखते ही वो हर बार यह सोचकर डर जाता था कि वह एक राक्षस है। उससे इतनी अच्छी लड़की कैसे प्यार कर सकती है।

एक दिन उस राक्षस ने ब्यूटी से पूछा कि क्या वो उससे शादी करेगी? ब्यूटी ने बिना डरे राक्षस को मना कर दिया। ब्यूटी के मुंह से ना सुनने के बाद बीस्ट दुखी होकर चला गया। राक्षस रोज ब्यूटी से शादी की बात करता और वह रोज मना कर देती। देखते ही देखते बीस्ट ने उसे अपने घर वापस जाने की इजाजत दे दी। ब्यूटी बहुत खुश हुई। फिर राक्षस ने ब्यूटी को एक अंगूठी देते हुए कहा कि अगर तुम्हें कभी भी वापस आने का मन करे, तो तुम इसे अपनी उंगली से उतार देना।

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ब्यूटी घर पहुंची और अपने परिवार के साथ खुशी-खुशी रहने लगी। दो हफ्ते बाद उसे अचानक राक्षस की याद आई। उसने हाथ से अंगूठी उतारी और महल पहुंच गई। वहां जाकर उसे पता चला कि बीस्ट बीमार पड़ गया है। तब ब्यूटी ने उसका बहुत ख्याल रखा और वो कुछ दिन बाद ठीक हो गया।

ठीक होने के बाद राक्षस रोज ब्यूटी की सेवा करता था। उसका प्यार देखकर ब्यूटी को वह पसंद आने लगा। एक दिन जब दोबारा राक्षस ने उससे शादी के बारे में पूछा, तो ब्यूटी ने हां कर दी। तब बीस्ट ने पूछा कि क्या वो इतने बड़े और अजीब-से दिखने वाले राक्षस के साथ जिंदगी भर रह सकती है। उसने कहा कि हां वो उससे प्यार करने लगी है।

ब्यूटी ने जैसे ही ऐसा कहा, तो वह राक्षस अचानक राजकुमार बन गया। तब राक्षस ने उसे बताया कि वह बुरे श्राप के कारण राजकुमार से बीस्ट बन गया था। उसने कहा है कि यह श्राप केवल सच्चे प्यार से ही दूर हो सकता था, जो हो गया। इसके बाद ब्यूटी और राजकुमार ने शादी कर ली और दोनों खुशी-खुशी रहने लगे।

सीख – किसी की भी शक्ल देखकर उसे अच्छा या बुरा नहीं कहते। इंसान के चेहरे की जगह उसके गुण देखने चाहिए।

3. मूर्ख भालू की कहानी (Bedtime Stories For Kids)

एक जंगल में एक लालची भालू रहता था. वह हर समय ज्यादा की तलाश में रहता था. थोड़े से वह कभी संतुष्ट नहीं होता है. एक दोपहर जब वह सोकर उठा, तो उसे ज़ोरों की भूख लग आई. वह भोजन की तलाश में निकल पड़ा.

उस दिन मौसम साफ़ था. सुनहरी धूप खिली हुई थी. भालू ने सोचा, “कितना अच्छा मौसम है. इस मौसम में तो मुझे मछली पकड़नी चाहिए. चलो, आज मछली की ही दावत की जाए.”

ये सोचकर उसने नदी की राह पकड़ ली. नदी किनारे पहुँचकर भालू ने सोचा कि एक बड़ी मछली हाथ लग जाये, तो मज़ा आ जाये. उसने पूरी उम्मीद से नदी में हाथ डाला और एक मछली उसके हाथ आ गई. वह बहुत ख़ुश हुआ. लेकिन, जब उसने हाथ नदी से बाहर निकला, तो देखा कि हाथ लगी मछली छोटी सी है.

वह बहुत निराश हुआ. अरे इससे मेरा क्या होगा? बड़ी मछली हाथ लगे, तो बात बने. उसने वह छोटी मछली वापस नदी में फ़ेंक दी और फिर से मछली पकड़ने तैयार हो गया.

कुछ देर बाद उसने फिर से नदी में हाथ डाला और उसके हाथ फिर से एक मछली लग गई. लेकिन, वह मछली भी छोटी थी. उसने वह मछली भी यह सोचकर नदी में फेंक दी कि इस छोटी सी मछली से मेरा पेट नहीं भर पायेगा.

वह बार-बार नदी में हाथ डालकर मछली पकड़ता और हर बार उसके हाथ छोटी मछली लगती. वह बड़ी की आशा में छोटी मछली वापस नदी में फेंक देता. ऐसा करते-करते शाम हो गई और उसके हाथ एक भी बड़ी मछली नहीं लगी.

भूख के मारे उसका बुरा हाल हो गया. वह सोचने लगा कि बड़ी मछली के लिए मैंने कितनी सारी छोटी मछलियाँ फेंक दी. उतनी छोटी मछलियाँ एक बड़ी मछली के बराबर हो सकती थी और मेरा पेट भर सकता था.

सीख – “आपके पास जो है, उसका महत्व समझें. भले ही वह छोटी सही, लेकिन कुछ न होने से बेहतर है.”

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